श्री गणेश जी की आरती(Shri Ganesh Ji Ki Aarti), भजन और स्तुति का यह विशेष संग्रह भक्तों के लिए समर्पित है। यहां आपको गणेश भगवान की लोकप्रिय आरतियाँ जैसे “जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा”, मराठी में प्रसिद्ध आरती “सुखकर्ता दुखहर्ता”, साथ ही “शेंदुर लाल चढ़ायो”, “आरति गजवदन विनायक की” और “श्री गणपति भज प्रगट पार्वती अंक बिराजत अविनाशी” का सुंदर संग्रह मिलेगा।
यह पवित्र आरती संग्रह आपकी पूजा, आराधना और दैनिक भक्ति में शांति, सकारात्मकता और मंगल ऊर्जा का संचार करेगा।
Shri Ganesh Ji Ki Aarti: भगवान श्री गणेश जी की आरती गीत और वंदना संग्रहआपके लिए है, जिस्में ये आरतीएं संमिलित हैं “जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा”, श्री गणेश आरती मराठी में “सुख करता दुख हर्ता”, “शेंदुर लाल चढायो” ,“आरति गजवदन विनायक की” और “श्री गनपति भज प्रगट पार्वती अंक बिराजत अविनासी”।

गणेश जी के मंत्र
ॐ गं गणपतये नम:
वक्रतुण्ड महाकाय कोटिसूर्य समप्रभ।
निर्विघ्नं कुरू मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा।।
ॐ एकदन्ताय विद्धमहे, वक्रतुण्डाय धीमहि,
तन्नो दन्ति प्रचोदयात्॥
ॐ ग्लौम गौरी पुत्र, वक्रतुंड, गणपति गुरू गणेश।
ग्लौम गणपति, ऋदि्ध पति, सिदि्ध पति। मेरे कर दूर क्लेश।।
ॐ नमो गणपतये कुबेर येकद्रिको फट् स्वाहा।
Shri Ganesh Ji Ki Aarti
॥ जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश देवा ॥
जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा॥
एकदंत दयावंत, चार भुजा धारी।
माथे सिंदूर सोहे, मूषक की सवारी॥
जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा॥
पान चढ़े, फल चढ़े, और चढ़े मेवा।
लड्डुओं का भोग लगे, संत करें सेवा॥
जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा॥
अंधन को आंख देत, कोढ़िन को काया।
बांझन को पुत्र देत, निर्धन को माया॥
जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा॥
‘सूर’ श्याम शरण आए, सफल कीजै सेवा।
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा॥
जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा॥
Shri Ganesh Ji Ki Aarti
॥ सुखकर्ता दुखहर्ता आरती ॥
सुखकर्ता दु:खहर्ता, वार्ता विघ्नांची
नुरवी पूर्वी प्रेम कृपा जयाची।
सर्वांगी सुंदर उटी शेंदुराची,
कंठी झळके माळ मुकुटाफळांची॥
जय देव जय देव, जय मंगलमूर्ती।
दर्शनमात्रे मनकामना पूर्ती॥
जय देव जय देव॥
रत्नखचित फरा तुज गौरीकुमरा,
चंदनाची उटी कुमकुम केशरा।
हिरेजडित मुकुट शोभतो वरा,
रुंजी न घुंघुराचे नूपुरे घागरिया॥
जय देव जय देव, जय मंगलमूर्ती।
दर्शनमात्रे मनकामना पूर्ती॥
जय देव जय देव॥
लंबोदर पीतांबर, फणिवर वंदना,
सरल सोंड वक्रतुंडा त्रिनयना।
दास रामाचा वाट पाहे सदना,
संकटी पावावे निर्वाणी रक्षावे सुरवर वंदना॥
जय देव जय देव, जय मंगलमूर्ती।
दर्शनमात्रे मनकामना पूर्ती॥
जय देव जय देव॥
Shri Ganesh Ji Ki Aarti :
॥ शेंदूर लाल चढ़ायो आरती ॥
शेंदूर लाल चढ़ायो अच्छा गजमुख को,
दोंदल लाल बिराजे सूत गौरी हर को।
हाथ लिए गुड़ लड्डू साईं सुरवर को,
महिमा कहें न जाए, लगत हूँ पद को॥
जय जय… जय जय…
जय जय श्री गणराज विद्या सुखदाता,
धन्य तुम्हारो दर्शन, मेरा मत रमता।
जय देव जय देव॥
अष्ट सिद्धि दासी, संकट के बैरी,
विघ्न विनाशन मंगल मूर्ति अधिकारी।
कोटि सूरज प्रकाश ऐसी छवि तेरी,
गंडस्थल मदमस्तक झूलत शशि भारी॥
जय जय… जय जय…
जय जय श्री गणराज विद्या सुखदाता,
धन्य तुम्हारो दर्शन, मेरा मत रमता।
जय देव जय देव॥
भाव-भक्ति से कोई शरणागत आवे,
संतति-संपत्ति सबही भरपूर पावे।
ऐसे तुम महाराज मोको अति भावे,
गोसावीनंदन निशिदिन गुण गावे॥
जय जय… जय जय…
जय जय श्री गणराज विद्या सुखदाता,
धन्य तुम्हारो दर्शन, मेरा मत रमता।
जय देव जय देव॥
Shri Ganesh Ji Ki Aarti
॥ आरती गजबदन विनायक की ॥
आरती गजबदन विनायक की।सुर-मुनि-पूजित गणनायक की॥
आरती गजबदन विनायक की।सुर-मुनि-पूजित गणनायक की॥
आरती गजबदन विनायक की॥
एकदन्त शशिभाल गजानन,विघ्नविनाशक शुभगुण कानन।
शिवसुत वन्द्यमान-चतुरानन,दुःखविनाशक सुखदायक की॥
आरती गजबदन विनायक की॥
ऋद्धि-सिद्धि-स्वामी समर्थ अति,विमल बुद्धि दाता सुविमल-मति।
अघ-वन-दहन अमल अबिगत गति,विद्या-विनय-विभव-दायककी॥
आरती गजबदन विनायक की॥
पिङ्गलनयन, विशाल शुण्डधर,धूम्रवर्ण शुचि वज्रांकुश-कर।
लम्बोदर बाधा-विपत्ति-हर,सुर-वन्दित सब विधि लायक की॥
आरती गजबदन विनायक की॥
Shri Ganesh Ji Ki Aarti
॥ श्रीगनपति भज प्रगट पार्वती अंक बिराजत अविनासी ॥
श्री गनपति भज, प्रगट पार्वती अंक बिराजत अविनाशी।
ब्रह्मा-विष्णु-शिवादि सकल सुर, करत आरती उल्लासी॥
त्रिशूलधर को भाग्य मानिकैं, सब जुड़ि आए कैलासी।
करत ध्यान, गंधर्व गान-रत, पुष्पन की हो वर्षा-सी॥
धन्य भवानी व्रत साधि लह्यो, जिन पुत्र परम गोलोकवासी।
अचल अनादि अखंड परात्पर, भक्त हेतु भव-परकाशी॥
विद्या-बुद्धि-निधान गुणाकर, विघ्न-विनाशन दुखनाशी।
तुष्टि-पुष्टि शुभ लाभ-लक्ष्मी संग, ऋद्धि-सिद्धि-सी हैं दासी॥
सब कारज जग होत सिद्ध, शुभ द्वादश नाम कहे छासी।
कामधेनु–चिंतामणि–सुरतरु, चार पदारथ देतासी॥
गज-आनन शुभ सदन, रदन-इक सुंड धुंधि पुर पूजा-सी।
चार भुजा मोदक-करतल सजि, अंकुश धारण करत फरसा-सी॥
व्यालसूत्र त्रिनेत्र भाल पर, शशि, उंदुर वाहन सुखरासी।
जिनके सुमिरन सेवन करते, टूट जात जम की फांसी॥
कृष्णपाल धरिके ध्यान निरंतर, मन लगाय जो कोई गासी।
दूर करें भव की बाधा प्रभु, मुक्ति जन्म निजपद पासी॥
भगवान श्री गणेश जी की आरती, स्तुति और भजन न केवल भक्ति का माध्यम हैं, बल्कि जीवन में सकारात्मक ऊर्जा, बुद्धि, सुख और सफलता का आशीर्वाद भी प्रदान करते हैं। जय गणेश जय गणेश, सुखकर्ता दुखहर्ता, शेंदूर लाल चढ़ायो, आरती गजवदन विनायक की और श्री गनपति भज जैसी आरतियाँ भक्तों के हृदय में श्रद्धा, शक्ति और विश्वास की नई ज्योति जगाती हैं।
गणपति बप्पा के 108 दिव्य नाम – जैसे वक्रतुंड, एकदंत, लंबोदर, गजानन, विघ्नहर्ता, सिद्धिविनायक, मंगलमूर्ति, धूम्रवर्ण, महागणपति आदि – उनकी अद्वितीय शक्तियों, रूपों और करुणा को दर्शाते हैं। इन 108 नामों का जप, स्मरण या पाठ मन को एकाग्र करता है, सभी विघ्न दूर करता है और जीवन में मंगल, बुद्धि और समृद्धि लाता है।
नियमित आरती, मंत्र व 108 नामों का उच्चारण करने से जीवन के हर क्षेत्र में शुभ परिणाम प्राप्त होते हैं।
हे श्री गणेश, विघ्नों का नाश कर, सभी भक्तों को सुख, शांति, ज्ञान और समृद्धि का आशीर्वाद दें।


